sumitra gupta
Sunday, 16 March 2014
ॐ सृष्टि की हर वस्तु परिवर्तनशील-- लेकिन शाश्वत है कहा जाता है- ब्रह्म सत्य ,जगत मिथ्या। लेकिन जिसका निर्माण ब्रह्म से हुआ है,वह मिथ्या कैसे हो सकता है?यह बात थोड़ी जानने ,समझने योग्य है।प्रभु प्रेरणा से मैं अपनी क्षुद्र मति से कुछ समझने-समझाने की कोशिश कर रही हूँ।परमतत्व परमेश्वर की एक से अनेक होने प्रक्रिया ही सृष्टि कहलायी,यह सभी जानते हैं प्रभु की अनन्त सृष्टि में क्या-क्या छिपा हुआ है ये तो वे ही जाने।प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से संसार की हर वस्तु की निर्मिति ईश्वर द्वारा ही की गयी है।जल,थल,नभ,जड़ चेतन,चराचर सम्पूर्ण जगत सभी कुछ प्रभु का ही निर्माण है।यद्यपि यँहा प्रत्येक वस्तु का प्रतिपल परिवर्तन है, ह्रास है,नष्ट होना है,विनाश होना है,पर यह भी सत्य है कि किसी भी वस्तु की शाश्वतता,उसकी सत्ता की समाप्ति कभी नहीं होती अर्थात वह वस्तु किसी ना किसी रूप में इस जगत में ही रहती है।क्योंकि वह बनी भी तो उन अविनाशी परमतत्व से ही है।नष्ट और परिवर्तित होते हुये भी इसी सृष्टि में कहीं ना कहीं,कसी ना किसी रूप में रहती ही है।RECYCLING की प्रक्रिया उसकी होती रहती है।मैं अपनी इस बात को इस उदाहरण से इस प्रकार समझाती हूँ- एक कागज जो कि वृक्ष से प्राप्त होता है उसको जलाया गया तो वह राख में परिवर्तित हो गया,वह राख मिट्टी में मिलकर मिट्टी रूप हो गयी और पुनः मिट्टी में बीज आरोपित किया गया और वृक्ष के रूप में फिर उसकी परिणिति हुयी और पुनः लकड़ी से कागज बनाया गया।हाँलाकि वह कागज नष्ट हुआ,परिवर्तित हुआ,मिट्टी में मिला,वृक्ष बना और पुनः कागज बना,इस तरह प्रक्रियायें तो कई हुयी उस कागज की लेकिन अन्तोत्गत्वा वह इस सृष्टि में ही शाश्वत मौजूद रहा किसी ना किसी रूप में।इसी तरह उन अनन्त की,अनन्त-अनन्त क्रिया-प्रतिक्रयायें इस सृष्टि में चलती रहती हैं और हम सभी भी उत्पन्न,परिवर्तित,नष्ट होते रहते हैं और उनकी इच्क्षानुसार उन्हीं से निकले उन्हीं में समाहित हो जाते हैं।संसार के गर्भ में ना जाने क्या-क्या समाया है,कभी वह किसी रूप में प्रगट होता है तो कभी वह किसी रूप में।लीलाधार की लीला लीलाधर ही जाने। अतःसृष्टि की हर वस्तु विनाशी और परिवर्तनशील होते हुये भी शाश्वत है,अविनाशी परमतत्व की तरह। श्रीतुलसीदासजी की पंक्तिया तो देखिये------- ईश्वर अंश जीव अविनाशी, चेतन अमल सहज सुख राशी।। जय श्री राधे ृृृृृृृृृ
ॐ सृष्टि की हर वस्तु परिवर्तनशील-- लेकिन शाश्वत है कहा जाता है- ब्रह्म सत्य ,जगत मिथ्या। लेकिन जिसका निर्माण ब्रह्म से हुआ है,वह मिथ्या कैसे हो सकता है?यह बात थोड़ी जानने ,समझने योग्य है।प्रभु प्रेरणा से मैं अपनी क्षुद्र मति से कुछ समझने-समझाने की कोशिश कर रही हूँ।परमतत्व परमेश्वर की एक से अनेक होने प्रक्रिया ही सृष्टि कहलायी,यह सभी जानते हैं प्रभु की अनन्त सृष्टि में क्या-क्या छिपा हुआ है ये तो वे ही जाने।प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से संसार की हर वस्तु की निर्मिति ईश्वर द्वारा ही की गयी है।जल,थल,नभ,जड़ चेतन,चराचर सम्पूर्ण जगत सभी कुछ प्रभु का ही निर्माण है।यद्यपि यँहा प्रत्येक वस्तु का प्रतिपल परिवर्तन है, ह्रास है,नष्ट होना है,विनाश होना है,पर यह भी सत्य है कि किसी भी वस्तु की शाश्वतता,उसकी सत्ता की समाप्ति कभी नहीं होती अर्थात वह वस्तु किसी ना किसी रूप में इस जगत में ही रहती है।क्योंकि वह बनी भी तो उन अविनाशी परमतत्व से ही है।नष्ट और परिवर्तित होते हुये भी इसी सृष्टि में कहीं ना कहीं,कसी ना किसी रूप में रहती ही है।RECYCLING की प्रक्रिया उसकी होती रहती है।मैं अपनी इस बात को इस उदाहरण से इस प्रकार समझाती हूँ- एक कागज जो कि वृक्ष से प्राप्त होता है उसको जलाया गया तो वह राख में परिवर्तित हो गया,वह राख मिट्टी में मिलकर मिट्टी रूप हो गयी और पुनः मिट्टी में बीज आरोपित किया गया और वृक्ष के रूप में फिर उसकी परिणिति हुयी और पुनः लकड़ी से कागज बनाया गया।हाँलाकि वह कागज नष्ट हुआ,परिवर्तित हुआ,मिट्टी में मिला,वृक्ष बना और पुनः कागज बना,इस तरह प्रक्रियायें तो कई हुयी उस कागज की लेकिन अन्तोत्गत्वा वह इस सृष्टि में ही शाश्वत मौजूद रहा किसी ना किसी रूप में।इसी तरह उन अनन्त की,अनन्त-अनन्त क्रिया-प्रतिक्रयायें इस सृष्टि में चलती रहती हैं और हम सभी भी उत्पन्न,परिवर्तित,नष्ट होते रहते हैं और उनकी इच्क्षानुसार उन्हीं से निकले उन्हीं में समाहित हो जाते हैं।संसार के गर्भ में ना जाने क्या-क्या समाया है,कभी वह किसी रूप में प्रगट होता है तो कभी वह किसी रूप में।लीलाधार की लीला लीलाधर ही जाने। अतःसृष्टि की हर वस्तु विनाशी और परिवर्तनशील होते हुये भी शाश्वत है,अविनाशी परमतत्व की तरह। श्रीतुलसीदासजी की पंक्तिया तो देखिये------- ईश्वर अंश जीव अविनाशी, चेतन अमल सहज सुख राशी।। जय श्री राधे ृृृृृृृृृ
ॐ गं गणपतये नमः जनरेशन गेप-यानि- पीढ़ी अन्तराल एक सूक्ष्म एवं यथार्थ अवलोकन आज हर एक ज़ुबां पर बस एक ही फिकरा है,जनरेशन गेप है भाई,जनरेशन गेप--पर क्या है भाई,ये जनरेशन गेप अथवा पीढ़ी अन्तराल।अरे,ये अन्तराल तो युगों युगों से चला आ रहा है और युगों-युगों तक शाश्वत रहेगा।संसार के रहने तक इसका असितत्व ऐसे ही बरकरार रहेगा।क्योंकि जब-जब हर व्यक्ति माँ-बाप बनेगा,तब-तबउसकी सन्तानें जनरेशन गेप की दुहाई देती रहेगीं।अरे,मगर आज इस जनरेशन गेप ने संसार को दिया क्या है. विकृत मानसिकता,तबाही,वैमनस्यता,संस्कारों का ह्रास,बडों का अनादर,दिलों की दूरियां,दाम्पत्यजीवन का ह्रास,पल-पल बदलते हुये निर्णय,संवेदनशून्यता,नृशंसतायें,मनमानेक्रियाकलाप, उदंण्डतायें,यन्त्रों का प्रयोग करते-करते, खुद भी यन्त्रवत बन जाना और ना जाने क्या-क्या?ये हम सभी की नजरों से कुछ भी छिपा नहीं है।क्या इसको ही जनरेशन गेप कहने में हम आप सभी की बड़ाई है?जैसे पहले मेहनत,मजदूरी करके ही धन आता था,वैसे ही अब भी है।आज कौन सा नवयुवक बिना मेहनत किये धन एवं मान-सम्मान पा सकता है।आजकल तो प्राईवेट कम्पनियों में आठ-आठ घन्टों के वजाय,बारह-चौदह घन्टों का work loud है। पीढ़ी-अन्तराल के नाम पर नवयुवतियों ने तो हद ही पार कर दी है।नवयुवतियों के शरीरों से झांकती नग्नता,फूहड़ता आदि को हम जनरेशन-गेप का नाम देकर देख रहे हैं।नवयुवकों द्वारा अश्शील फिल्मों को देखते रहना,तरह-तरह के नशे करना और फिर अस्मिता लूटने का घिनौना खेल।समाज में वहशीपन का,दरिन्दगी का नज़ारा,छोटी-छोटी बच्चियों पर भी इस वहशीपने को,इस बर्बरता को अंजाम देना,क्या यही है?आज की जनरेशन-गेप कहने वालों की क्रियायें।इस जनरेशन गेप का राग अलापने वाले युवक-युवतियों ने अगर उन्नति की होती,तब तो कद्र भी होती,मगर चारों तरफ तबाही का मंजर देखकर तो दिल खून के आँसू रोता है।आज जब नवयुवतियां शादी होकर ससुराल जाती हैं,तो जनरेशन-गेप की दुहाई देकर सेवा-सुश्रुषा से कतराती हैं परिवारी जनों को पुराने ख्यालात का बताकर मनमानी करती हैं और अपने बुरे बर्ताव से सभी को दुःख पहुँचाती हैं।जो लड़की तीन कुलों को संवारने वाली कही जाती है वह आज अपने कर्त्तव्यों से पलायन कर रही है।स्लिम-ट्रिम दिखने के चक्कर में डाइटिंगकी जाती है।पोषक तत्वों को ना लेने के कारण शारीरिक क्षमता इतनी नहीं होती कि घर-परिवार की जिम्मेदारियां भली प्रकार से निभा सकें।अब क्या कहूँ,जनरेशन-गेप वाले युवक-युवतियों के परिवारों का।बस JOB,PACK-MASALE, होटल में खाना, बच्चों को आया के भरोसे छोड़ना,यही सब ज्यादातर चल रहा है।ना बच्चों पर ध्यान ना पति-पत्नी में सांमजस्य,शीघ्र ही टूटती-बिखरती जिन्दगी, एकाकी परिवार,बस यही दिया है जनरेशन-गेप वाले विचारों ने।सँभलों!जनरेशन-गेप का नारा बुलन्द करने वाले नयी पीढ़ी के युवाओं।अपना राग अलापना बन्द करो।काम-वासना के झूठेप्यार में आकर्षित होकर,प्रेम-विवाह करना,LIVING-RELATIONSHIP में रहना, क्या यही देन होनी चाहिये,जनरेशन-गेप की।हर कुरीति को जनरेशन-गेप ही का जामा पहना दिया जाता है।आज नयी पीढ़ी के लोंगों का, ना सही समय से जागना है,और ना सही समय से सोना है।व्यायाम के नाम पर बस जिम अटेन्ड कर लिये जाते हैं।जो व्यायाम बिना मशीनों के हो सकता है,उसकों मशीनों से करके अपना स्वास्थ्य बरकरार रखने का चलन हो गया है।वैसे अब जो मैं बताने जा रहीं हूँ,उस पर आप सभी को थोड़ा आश्चर्य होगा,लेकिन है बिल्कुल सत्य।वह है कि आजकल जनरेशन-गेप तो है ही नहीं।चारों तरफ खुलापन और उन्मुक्तता है,माँ-बाप से बच्चे इस तरह बात करते हैं,जैसे उनके बरोबर के हों किसी का आदर-सम्मान भी मन-माने तरीके से,स्वार्थपरता से ही होता है।घर में बड़े- बुर्जुगों की भी उम्र का लिहाज नहीं किया जाता।हाँ,उन्नीसवीं सदी और उससे आगे की सदियों में जनरेशन-गेप माना जा सकता था।तब रिश्तों में भी,व्यवहार में भी और बोलने के तौर-तरीकों में भी एक दूरी थी,एक शिष्टाचार था,एक सम्मान था,वो सब आजकल नहीं रहा।फिर भी आज की पीढ़ी जनरेशन-गेप-,जनरेशन-गेप का राग अलापे तो ये आज की पीढ़ी की नासमझी,और बड़ी बुरी बात होगी। अन्त में,मैं आज की पीढ़ी से यह कहना चाहूँगी कि पीढ़ी अन्तराल हो अथवा ना हो, क्या फर्क पड़ता है? बस रिश्तों की गरिमा हमेशा बनाकर रखी जानी चाहिये। बड़े छोटों का लिहाज होना चाहिये।जिन बुनियादी बातों की, संस्कारों की,नीतियों की,शुभ-सन्देशों की जरूरत पहले के लोंगों को थी,वैसी ही जरूरत आज के परिवेश में आप सभी के लिये भी रहेगी।जनरेशन-गेप जहाँ परिणाम में अचछा कुछ दे रहा हो,तो वो मानने योग्य अवश्य ही रहेगा।युवाओं से मेरी विशेष अर्ज है,यदि मैंने अपने लेखन से आप लोगों की भावनाओं को आहत किया हो तो माफी चाहूँगी,और यदि मैंने कुछ मानने योग्य बातें लिखीं हों,तो उन पर अवश्य गौर फरमाइयेगा।और अनमोल मानव-जीवन को धन्य बनाइयेगा। जय श्री राधे 09987648582 ृृृृृृृृृृृृ smt.sumitra rakesh gupta
ॐ गं गणपतये नमः जनरेशन गेप-यानि- पीढ़ी अन्तराल एक सूक्ष्म एवं यथार्थ अवलोकन आज हर एक ज़ुबां पर बस एक ही फिकरा है,जनरेशन गेप है भाई,जनरेशन गेप--पर क्या है भाई,ये जनरेशन गेप अथवा पीढ़ी अन्तराल।अरे,ये अन्तराल तो युगों युगों से चला आ रहा है और युगों-युगों तक शाश्वत रहेगा।संसार के रहने तक इसका असितत्व ऐसे ही बरकरार रहेगा।क्योंकि जब-जब हर व्यक्ति माँ-बाप बनेगा,तब-तबउसकी सन्तानें जनरेशन गेप की दुहाई देती रहेगीं।अरे,मगर आज इस जनरेशन गेप ने संसार को दिया क्या है. विकृत मानसिकता,तबाही,वैमनस्यता,संस्कारों का ह्रास,बडों का अनादर,दिलों की दूरियां,दाम्पत्यजीवन का ह्रास,पल-पल बदलते हुये निर्णय,संवेदनशून्यता,नृशंसतायें,मनमानेक्रियाकलाप, उदंण्डतायें,यन्त्रों का प्रयोग करते-करते, खुद भी यन्त्रवत बन जाना और ना जाने क्या-क्या?ये हम सभी की नजरों से कुछ भी छिपा नहीं है।क्या इसको ही जनरेशन गेप कहने में हम आप सभी की बड़ाई है?जैसे पहले मेहनत,मजदूरी करके ही धन आता था,वैसे ही अब भी है।आज कौन सा नवयुवक बिना मेहनत किये धन एवं मान-सम्मान पा सकता है।आजकल तो प्राईवेट कम्पनियों में आठ-आठ घन्टों के वजाय,बारह-चौदह घन्टों का work loud है। पीढ़ी-अन्तराल के नाम पर नवयुवतियों ने तो हद ही पार कर दी है।नवयुवतियों के शरीरों से झांकती नग्नता,फूहड़ता आदि को हम जनरेशन-गेप का नाम देकर देख रहे हैं।नवयुवकों द्वारा अश्शील फिल्मों को देखते रहना,तरह-तरह के नशे करना और फिर अस्मिता लूटने का घिनौना खेल।समाज में वहशीपन का,दरिन्दगी का नज़ारा,छोटी-छोटी बच्चियों पर भी इस वहशीपने को,इस बर्बरता को अंजाम देना,क्या यही है?आज की जनरेशन-गेप कहने वालों की क्रियायें।इस जनरेशन गेप का राग अलापने वाले युवक-युवतियों ने अगर उन्नति की होती,तब तो कद्र भी होती,मगर चारों तरफ तबाही का मंजर देखकर तो दिल खून के आँसू रोता है।आज जब नवयुवतियां शादी होकर ससुराल जाती हैं,तो जनरेशन-गेप की दुहाई देकर सेवा-सुश्रुषा से कतराती हैं परिवारी जनों को पुराने ख्यालात का बताकर मनमानी करती हैं और अपने बुरे बर्ताव से सभी को दुःख पहुँचाती हैं।जो लड़की तीन कुलों को संवारने वाली कही जाती है वह आज अपने कर्त्तव्यों से पलायन कर रही है।स्लिम-ट्रिम दिखने के चक्कर में डाइटिंगकी जाती है।पोषक तत्वों को ना लेने के कारण शारीरिक क्षमता इतनी नहीं होती कि घर-परिवार की जिम्मेदारियां भली प्रकार से निभा सकें।अब क्या कहूँ,जनरेशन-गेप वाले युवक-युवतियों के परिवारों का।बस JOB,PACK-MASALE, होटल में खाना, बच्चों को आया के भरोसे छोड़ना,यही सब ज्यादातर चल रहा है।ना बच्चों पर ध्यान ना पति-पत्नी में सांमजस्य,शीघ्र ही टूटती-बिखरती जिन्दगी, एकाकी परिवार,बस यही दिया है जनरेशन-गेप वाले विचारों ने।सँभलों!जनरेशन-गेप का नारा बुलन्द करने वाले नयी पीढ़ी के युवाओं।अपना राग अलापना बन्द करो।काम-वासना के झूठेप्यार में आकर्षित होकर,प्रेम-विवाह करना,LIVING-RELATIONSHIP में रहना, क्या यही देन होनी चाहिये,जनरेशन-गेप की।हर कुरीति को जनरेशन-गेप ही का जामा पहना दिया जाता है।आज नयी पीढ़ी के लोंगों का, ना सही समय से जागना है,और ना सही समय से सोना है।व्यायाम के नाम पर बस जिम अटेन्ड कर लिये जाते हैं।जो व्यायाम बिना मशीनों के हो सकता है,उसकों मशीनों से करके अपना स्वास्थ्य बरकरार रखने का चलन हो गया है।वैसे अब जो मैं बताने जा रहीं हूँ,उस पर आप सभी को थोड़ा आश्चर्य होगा,लेकिन है बिल्कुल सत्य।वह है कि आजकल जनरेशन-गेप तो है ही नहीं।चारों तरफ खुलापन और उन्मुक्तता है,माँ-बाप से बच्चे इस तरह बात करते हैं,जैसे उनके बरोबर के हों किसी का आदर-सम्मान भी मन-माने तरीके से,स्वार्थपरता से ही होता है।घर में बड़े- बुर्जुगों की भी उम्र का लिहाज नहीं किया जाता।हाँ,उन्नीसवीं सदी और उससे आगे की सदियों में जनरेशन-गेप माना जा सकता था।तब रिश्तों में भी,व्यवहार में भी और बोलने के तौर-तरीकों में भी एक दूरी थी,एक शिष्टाचार था,एक सम्मान था,वो सब आजकल नहीं रहा।फिर भी आज की पीढ़ी जनरेशन-गेप-,जनरेशन-गेप का राग अलापे तो ये आज की पीढ़ी की नासमझी,और बड़ी बुरी बात होगी। अन्त में,मैं आज की पीढ़ी से यह कहना चाहूँगी कि पीढ़ी अन्तराल हो अथवा ना हो, क्या फर्क पड़ता है? बस रिश्तों की गरिमा हमेशा बनाकर रखी जानी चाहिये। बड़े छोटों का लिहाज होना चाहिये।जिन बुनियादी बातों की, संस्कारों की,नीतियों की,शुभ-सन्देशों की जरूरत पहले के लोंगों को थी,वैसी ही जरूरत आज के परिवेश में आप सभी के लिये भी रहेगी।जनरेशन-गेप जहाँ परिणाम में अचछा कुछ दे रहा हो,तो वो मानने योग्य अवश्य ही रहेगा।युवाओं से मेरी विशेष अर्ज है,यदि मैंने अपने लेखन से आप लोगों की भावनाओं को आहत किया हो तो माफी चाहूँगी,और यदि मैंने कुछ मानने योग्य बातें लिखीं हों,तो उन पर अवश्य गौर फरमाइयेगा।और अनमोल मानव-जीवन को धन्य बनाइयेगा। जय श्री राधे 09987648582 ृृृृृृृृृृृृ smt.sumitra rakesh gupta
ॐ गं गणपतये नमः जनरेशन गेप-यानि- पीढ़ी अन्तराल एक सूक्ष्म एवं यथार्थ अवलोकन आज हर एक ज़ुबां पर बस एक ही फिकरा है,जनरेशन गेप है भाई,जनरेशन गेप--पर क्या है भाई,ये जनरेशन गेप अथवा पीढ़ी अन्तराल।अरे,ये अन्तराल तो युगों युगों से चला आ रहा है और युगों-युगों तक शाश्वत रहेगा।संसार के रहने तक इसका असितत्व ऐसे ही बरकरार रहेगा।क्योंकि जब-जब हर व्यक्ति माँ-बाप बनेगा,तब-तबउसकी सन्तानें जनरेशन गेप की दुहाई देती रहेगीं।अरे,मगर आज इस जनरेशन गेप ने संसार को दिया क्या है. विकृत मानसिकता,तबाही,वैमनस्यता,संस्कारों का ह्रास,बडों का अनादर,दिलों की दूरियां,दाम्पत्यजीवन का ह्रास,पल-पल बदलते हुये निर्णय,संवेदनशून्यता,नृशंसतायें,मनमानेक्रियाकलाप, उदंण्डतायें,यन्त्रों का प्रयोग करते-करते, खुद भी यन्त्रवत बन जाना और ना जाने क्या-क्या?ये हम सभी की नजरों से कुछ भी छिपा नहीं है।क्या इसको ही जनरेशन गेप कहने में हम आप सभी की बड़ाई है?जैसे पहले मेहनत,मजदूरी करके ही धन आता था,वैसे ही अब भी है।आज कौन सा नवयुवक बिना मेहनत किये धन एवं मान-सम्मान पा सकता है।आजकल तो प्राईवेट कम्पनियों में आठ-आठ घन्टों के वजाय,बारह-चौदह घन्टों का work loud है। पीढ़ी-अन्तराल के नाम पर नवयुवतियों ने तो हद ही पार कर दी है।नवयुवतियों के शरीरों से झांकती नग्नता,फूहड़ता आदि को हम जनरेशन-गेप का नाम देकर देख रहे हैं।नवयुवकों द्वारा अश्शील फिल्मों को देखते रहना,तरह-तरह के नशे करना और फिर अस्मिता लूटने का घिनौना खेल।समाज में वहशीपन का,दरिन्दगी का नज़ारा,छोटी-छोटी बच्चियों पर भी इस वहशीपने को,इस बर्बरता को अंजाम देना,क्या यही है?आज की जनरेशन-गेप कहने वालों की क्रियायें।इस जनरेशन गेप का राग अलापने वाले युवक-युवतियों ने अगर उन्नति की होती,तब तो कद्र भी होती,मगर चारों तरफ तबाही का मंजर देखकर तो दिल खून के आँसू रोता है।आज जब नवयुवतियां शादी होकर ससुराल जाती हैं,तो जनरेशन-गेप की दुहाई देकर सेवा-सुश्रुषा से कतराती हैं परिवारी जनों को पुराने ख्यालात का बताकर मनमानी करती हैं और अपने बुरे बर्ताव से सभी को दुःख पहुँचाती हैं।जो लड़की तीन कुलों को संवारने वाली कही जाती है वह आज अपने कर्त्तव्यों से पलायन कर रही है।स्लिम-ट्रिम दिखने के चक्कर में डाइटिंगकी जाती है।पोषक तत्वों को ना लेने के कारण शारीरिक क्षमता इतनी नहीं होती कि घर-परिवार की जिम्मेदारियां भली प्रकार से निभा सकें।अब क्या कहूँ,जनरेशन-गेप वाले युवक-युवतियों के परिवारों का।बस JOB,PACK-MASALE, होटल में खाना, बच्चों को आया के भरोसे छोड़ना,यही सब ज्यादातर चल रहा है।ना बच्चों पर ध्यान ना पति-पत्नी में सांमजस्य,शीघ्र ही टूटती-बिखरती जिन्दगी, एकाकी परिवार,बस यही दिया है जनरेशन-गेप वाले विचारों ने।सँभलों!जनरेशन-गेप का नारा बुलन्द करने वाले नयी पीढ़ी के युवाओं।अपना राग अलापना बन्द करो।काम-वासना के झूठेप्यार में आकर्षित होकर,प्रेम-विवाह करना,LIVING-RELATIONSHIP में रहना, क्या यही देन होनी चाहिये,जनरेशन-गेप की।हर कुरीति को जनरेशन-गेप ही का जामा पहना दिया जाता है।आज नयी पीढ़ी के लोंगों का, ना सही समय से जागना है,और ना सही समय से सोना है।व्यायाम के नाम पर बस जिम अटेन्ड कर लिये जाते हैं।जो व्यायाम बिना मशीनों के हो सकता है,उसकों मशीनों से करके अपना स्वास्थ्य बरकरार रखने का चलन हो गया है।वैसे अब जो मैं बताने जा रहीं हूँ,उस पर आप सभी को थोड़ा आश्चर्य होगा,लेकिन है बिल्कुल सत्य।वह है कि आजकल जनरेशन-गेप तो है ही नहीं।चारों तरफ खुलापन और उन्मुक्तता है,माँ-बाप से बच्चे इस तरह बात करते हैं,जैसे उनके बरोबर के हों किसी का आदर-सम्मान भी मन-माने तरीके से,स्वार्थपरता से ही होता है।घर में बड़े- बुर्जुगों की भी उम्र का लिहाज नहीं किया जाता।हाँ,उन्नीसवीं सदी और उससे आगे की सदियों में जनरेशन-गेप माना जा सकता था।तब रिश्तों में भी,व्यवहार में भी और बोलने के तौर-तरीकों में भी एक दूरी थी,एक शिष्टाचार था,एक सम्मान था,वो सब आजकल नहीं रहा।फिर भी आज की पीढ़ी जनरेशन-गेप-,जनरेशन-गेप का राग अलापे तो ये आज की पीढ़ी की नासमझी,और बड़ी बुरी बात होगी। अन्त में,मैं आज की पीढ़ी से यह कहना चाहूँगी कि पीढ़ी अन्तराल हो अथवा ना हो, क्या फर्क पड़ता है? बस रिश्तों की गरिमा हमेशा बनाकर रखी जानी चाहिये। बड़े छोटों का लिहाज होना चाहिये।जिन बुनियादी बातों की, संस्कारों की,नीतियों की,शुभ-सन्देशों की जरूरत पहले के लोंगों को थी,वैसी ही जरूरत आज के परिवेश में आप सभी के लिये भी रहेगी।जनरेशन-गेप जहाँ परिणाम में अचछा कुछ दे रहा हो,तो वो मानने योग्य अवश्य ही रहेगा।युवाओं से मेरी विशेष अर्ज है,यदि मैंने अपने लेखन से आप लोगों की भावनाओं को आहत किया हो तो माफी चाहूँगी,और यदि मैंने कुछ मानने योग्य बातें लिखीं हों,तो उन पर अवश्य गौर फरमाइयेगा।और अनमोल मानव-जीवन को धन्य बनाइयेगा। जय श्री राधे 09987648582 ृृृृृृृृृृृृ smt.sumitra rakesh gupta
Subscribe to:
Posts (Atom)